गत वर्ष दीपावली के आसपास जब डॉ. प्रमोद कुमार शर्मा ने भित्ति पत्रिका प्रारंभ करने का विचार मेरे सामने रखा तो मैंने कोई उत्साह नहीं दिखाया था क्योंकि मेरे विचार से इस तरह का प्रयास सफल होने की कोई संभावना ही नहीं थी। मैंने उनसे कह तो दिया कि आप प्रयास करें पर मैं मन ही मन यह जानती थी कि छात्र शायद ही इस तरह की सामग्री दे पाएँ।
पर डॉ. प्रमोद ने छात्रों पर ऐसा जादू किया कि मेरी धारणा के विपरीत इस पत्रिका का पहला अंक आपके सामने आ गया है। मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि यह कार्य हो गया है। मैं चाहती हूँ कि इस पत्रिका की कमान विभाग के वर्तमान व भूतपूर्व छात्र सँभाल लें ताकि जो चिंगारी डॉ. प्रमोद ने लगाई है वह मशाल बनकर भविष्य में भी बुदापैश्त को अपने प्रकाश से आलोकित करती रहे। उनका प्रयास व्यर्थ न चला जाए।
मैं इस पत्रिका के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हूँ।
(मारिया नैज्येशी)
संदेश
मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि ऐल्ते विश्वविद्यालय का भारतीय विद्या अध्ययन विभाग हिंदी में एक द्विमासिक भित्ति पत्रिका “प्रयास” निकालने जा रहा है जिसे इंटरनेट पर भी पढ़ा जा सकेगा।
मेरा विश्वास है कि यह पत्रिका हंगरी के भारत विद्या व हिंदी प्रेमियों के लिए एक ऐसा मंच और आईना साबित होगी जिसमें वे अपने विचारों और मन की भावनाओं को साकार कर सकेंगे।
मै सोचता हूँ कि अपनी मातृभाषा में भी साहित्य सृजन एक कठिन कार्य होता है, पर हंगरी के हिंदी प्रेमी जन एक विदेशी भाषा सीखकर उसमें कविताएँ, लेख आदि लिखने के साथ-साथ उसमें अनुवाद करने का दुष्कर कार्य कर रहे हैं। यह सचमुच ही स्तुत्य प्रयास है।
मैं इस पत्रिका के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।